इस मोहब्बत की किताब के, बस दो ही सबक याद हुए, कुछ तुम जैसे आबाद हुए, कुछ हम जैसे बरबाद हुए।
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दुआ
दूरियां
मोहब्बत
दिल पे
उदास
मंजिल