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बहारों

मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा, हमें तो कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा, आप तो डर गए हमारी एक ही अदा से, हमें आपकी कसम देकर हजारों ने लूटा।

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